पटाखों को ना कहें

पटाखों को ना कहें

दिवाली पर वो बड़े-बड़े बम छुड़ा रहे थे l
बम छुड़ाते समय देख बहुत इतरा रहे थे ll

हमने कहा ……………………………….

आप में बहुत हिम्मत है हम ये जान गए l

आप खतरों से खेलते है हम पहचान गए ll

आप अपनी शक्ति को यूँ व्यर्थ ना गवाये l
सरहद पे जाकर दुश्मन के छक्के छुड़ाए ll

ऐसे तो आप अपने पैसो में आग लगाएंगे l
दुश्मन को ढेर करो तो मैडल मिल जायेगे ll

आप पटाखे छुड़ाकर जो धुंआ फैला रहे है l
अनजाने में आप स्वयं बीमारी बुला रहे है ll

हम तभी खुशियो भरी दिवाली मना पाते है l
जब सिपाही अपना कर्त्तवय खूब निभाते है ll

अब ये जान जाये पैसो को यूँ ना आग लगाए l
ये ताकत व पैसा सिर्फ राष्ट्र निर्माण में लगाए ll

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