पारो जैसी लगती हो

पारो जैसी लगती हो

तुम तो पतझड़ मे भी बहारों जैसी लगती हो,
किसी झरने की मीठी धारों जैसी लगती हो।
मै तड़पता हुआ देवदास बन गया देखो,
तुम मुझे बिछड़ी हुई पारो जैसी लगती हो।।

©सत्येन्द्र गोविन्द
मुजौना,नरकटियागंज
पश्चिमी चम्पारण
:-8051804177

About Satyendra Govind

I always try to write the voice of my heart.