पिया मिलन

पिया मिलन की बात

सुनीसुनी सी रात, मन भीगा
याद आई तेरी, मन बहका

याद आये दिन वह मिलन के
सावन के भीगी भीगी रातों मे,

दूर गगन में जब बिजली चमकी,
बाँहे फैलाये तू लता सी चिपकी !

आँहे तेरी, जैसे बजा राग मल्लाहर
सखी, जैसे बैठी हो कर सोलह शृंगार

सुर्ख नैनों में आतुरता की धार !
लगा मधुर स्पर्श जैसे शीतल फुवार,

काली घटा में चमकी मन की आग
सांसे तेरी छेढ़ गई समर्पण के राग

नभ में समाये बादल,भीगी भीगी रात
सखी तुम में समाये हम,मिलन की सौगात !

सो न पाये, करवटें बदलते बीती सारी रात,
भूल नहीं पाएंगे, दो दिलों की वह मुलाकात !

अम्बर से बरसे जल,धरती से मिलने की बात
तरसे पिया मिलन को,लोग कहें बरसात।

सजन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.