पुरानी मुहब्बत तो संभाल लेना

अपने अन्दर इतनी भी नफरत मत पाल लेना
थोड़े-से दिल में पुरानी मुहब्बत तो संभाल लेना

जाने क्यूँ, हम, हम ना रह सके ? तुम, तुम ना रह सके
समंदर है ये इश्क़, खुद को कहीं भंवर में ना डाल लेना

नफरत की आग, भले ही राख कर दे मेरी यादें
उस भस्म से, मेरा धडकता दिल, निकाल लेना

मेरे वास्ते इन आँखों में गुरेज़ पालो, इससे बेहतर
थोड़े-से दिल में पुरानी मुहब्बत ही संभाल लेना

About MURARI SINGH

लिखने की नेमत छीन भी ले, 'गर खुदा किसी गलियारे मे मेरी पहचान रहेगी तुझसे ज़िंदा, कहता है मुझसे दिल मेरा

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