प्यार का मसौदा

प्यार का मसौदा

तेरी चाल में बिजली की अदा है
तेरी लटों का लहराना जुदा है

नज़र के नशीले तीर जो चलाये
गुलाबी लब पर ये दिल भी फ़िदा है

देखा जो तो देखते ही रह गये
चेहरा कमल फूल सा संजीदा है

मुस्कुरा के तुम बर्क़ गिराते गये
दिल मीठे सा दर्द से ग़मजदा है

ख़ुशबू बिखेर यों आँचल फहराये
चलने में किया मस्त मस्त अदा है

नभ में बर्क़ जैसे चमकती जाये
आशिकी में हर दिल तुम पे फिदा है

हुस्न की मार ने मारा सजन तुझे
ज्यों शोला भड़कता वो मसौदा है

  • सजन

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