प्रद्युम्न-श्रद्धांजलि

प्रद्युम्न-श्रद्धांजलि

बड़े प्यार से स्कूल भेजा, माँ ने अपना दुलारा l
नहीं जानती थी, नहीं अब वो आएगा दुबारा ll
बेफिक्र थी ये सोचकर वो स्कूल पहुंच चुका है l
नहीं पता था स्कूल में ही साँसे छोड़ चुका है ll

सुनकर खबर बच्चे की माँ का कलेजा थरथराया l
क्या हुआ जो दरिंदे ने उसे मौत की नींद सुलाया ll
मेरे लाल की आँखे न होती,ये देख तो ना पाताl
मेरा लाल मुझे छोड़कर मुझसे दूर तो ना जाता ll

मासूम चेहरे को देखकर भी दरिंदे को दया न आई l
बड़ी बेहरमी से उसकी गर्दन पर उसने छुरी चलाई ll
टूट गए माँ-बाप बेटे, प्रद्युम्न का शव सामने पाकर l
फट गया उनका कलेजा बेटे का शव गोद में उठाकर ll

ईश्वर करे ना ऐसा हो किसी और के बच्चे के साथ l
नाम हो गयी सबकी आंखे,दी श्रद्धांजलि सबने साथll
आज यही हम सब चाहते है,प्रद्युम्न को मिले न्याय l
मिलेगी उसकी आत्मा को शांति, ॐ नमः शिवायll

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