प्रेमरंग की होली

प्रेमरंग की होली

शीत ऋतु की हुई विदाई।
ग्रीष्म ऋतु में आई होली।।

खिले टेसू के फूल प्यारे।
केसरिया ये प्यारे -प्यारे।।

परीक्षा भी नजदीक आई।
करो जमकर तुम पढ़ाई।।

दादा से पिचकारी मंगाई।
दादी अबीर भर के लाई।।

किशन ने डफली बजाई।
फाग गीतों की बारी आई।।

लाल हरा पीला नीला ये।
रंग भर भर गुलाल उड़ाई।।

जलेबी और नमकीन की।
घर घर खुशबू आई भाई।।

मंजीरे भी खूब बजाती।
फ़ाग खेलने आई टोली।।

हंसी खुशी और ठिठोली।
लेकर भाईचारा आई होली।।

पिचकारी और गुब्बारों में।
भर भर रंग और खेले होली।।

असत्य की होली जलाओ।
फिर खेलो प्रेमरंग की होली।।

कवि राजेश पुरोहित
98,पुरोहित कुटी,
श्रीराम कॉलोनी
भवानीमंडी
मोबाइल 7073318074

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.