प्रेम गाथा

चाँद-तारों की बातों में प्रेम जताने चांदनी का जिक्र आता
खिले फूलों की मादकता समझाने भंवरें-तितलियों की गाथा
किसी नशे के हालात पर सुरा संग शाकी का जिक्र आता
हाव-भाव से यह रहस्य सुलझा रही दुनिया कहकर प्रेम गाथा
हंसी,खुशी या ग़म,बाल अवस्था से यौवन या वार्धक्य जब आता
उन जीवन धारा को सरस बनाने दिखे अलग-अलग सी प्रेम गाथा
ममता का रूप,खिलती तरूणाई,कर्तव्य में प्रेम का जिक्र आता
प्रिय-प्रियतमा की गरिमा होती अलबेली जब बन जाती प्रेम गाथा
हृदय की धड़कन,मन का चैन, उपमाओं में प्रेम का जिक्र आता
अजब अदा बन गई, विरह या मिलन हर पहलू पर प्रेम गाथा
दुनिया आंक रही कीमत रिश्तों की,जिसमें प्रेम का जिक्र आता
सजन

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