फिर मिलेंगे हम

फिर मिलेंगे हम

फिर मिलेंगे हम

समुंद्र की लहरों पर

समर्पण की नाव पर सवार

अपने अपने आसुओं को

विसर्जित करेंगे

सदा के लिए

विरहा की अग्नि से

पिघला सूरज

यादों के घनीभूत

जलवाष्प बन कर

बादल सा बरसेंगे

होगी धरा सिंचित

बीज होगा अंकुरित

प्रेम पुष्प खिलेंगे

सुगन्धित पवन

उड़ा ले जायेंगे

प्रेम का सन्देश

फूलों और तितलियों के

रंगों में घुल मिल

मनोरम छटाएँ बिखेरेंगे

गायेंगे झूम-झूम कर

मिलन के गीत

एक दूजे से

जो पाया था

पूनम की रातों में

चांदनी बन बाटेंगे

और एक दिन

चमकते सितारे बन

अपनी ही धुरी पर घूमते

प्रेम धुन में थिरकते

ब्रहमांड का हिस्सा

बन जायेंगे हम

 

 

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

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