बचपन

बचपन

बचपन की वह शरारत वह जमाना याद आता है
खूब वारिश में भिगना नाहना याद आता है

दौड़ा भागी खेल कुद और कितनी कितनी यादें
काग़ज की कस्ती बनाकर बहाना याद आता है

बचपन की वह बाहदुरी ना जाने कहाँ खो गई
कभी छत की मुंडेर पर पांव चलाना याद आता है

बचपन की वह दिलेरी ना जाने अब कहाँ खो गई
टिफिन बक्स से दोस्त को खिलाना याद आता है

बचपन की वह बात सारी न जाने कहाँ खो गई
मित्र के दुख में आंसु निकल जाना याद आता है

न जाने क्यों सजन को अब बचपन बहुत याद आए
समझदार हो मासुमियत गवाना याद आता है

सजन

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