बजरंगबली

बजरंगबली

ये एक सच्चाई है जिसे मैंने कविता का रूप दिया है :

आज भी बजरंगबली ,चहुँ ओर विधमान है l
श्री राम के दूत है,हम कहते इन्हे हनुमान हैll
रूप विशाल है ,सिर पर मुकुट विराजमान है l
हाथ में गदा लिए, चमक लाली सामान है ll

देते है दर्शन उन्हें, जिनका मन पवित्र है l
करते जो निऱ्स्वार्थ सेवा उनके वो मित्र हैll
स्वयं को नहीं मानते, ईश्वर का वो रूप l
कहते है दूत हूँ उनका नहीं हूँ उनका रूपll

मै अपने भक्तों को हर संकट से बचाता हूँ l
करता हूँ उनकी रक्षा,रक्षक बन जाता हूँ ll
ये विधि का विधान, बदल नहीं पायेगा l
पूजा करो ईश्वर की काश कुछ हो पायेगाll

नहीं था विश्वास मुझे आज विश्वास हो गया l
आत्मा व परमात्मा होने का ज्ञान हो गया ll
ना की मैंने कभी पूजा, ना किया कभी ध्यानl
की निऱ्स्वार्थ सेवा सम्मुख आये वीर हनुमानll
जय श्री राम ! जय श्री राम !! जय श्री राम !!!

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