बता दो अभी

बता दो अभी

अगर प्यार है तो बता दो अभी,
इन्तजार की हमकों आदत नहीं,
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इन्कार-इकरार के बीच हूँ फंसा,
बे-वजह तड़पने का जब हुनर ही नहीं,
*
ख़ामोश जुबां से कह देंगे अलविदा,
मज़बूरी क्या थी, कभी पूछेंगे नहीं,
*
फैसला इश्क़ का होगा तभी,
जताओगी, प्यार तुम्हें भी है या नहीं….
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# विराज़

About "विराज़"

"Poet"

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