बस इतना

बस इतना सिखा देना की जिंदगी गुजरती कैसे है यादो के सहारे से,
शायद मैं फिर चला ही जाऊ तुम्हारी महफ़िल से.
श्रेयस अपूर्व
भोपाल

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*