बिटिया

तू जब जीवन मैं आई
खुशिया ढेरो संग लाई,

तेरी हंसी रंगबिरंगी कलि,
बाते मानो मिश्री की डली,

तेरी प्यारी शरारते दुख मैं भी चैन देती,
मीठे सवाल जिंदगी के जवाब देती,
ये खुशियाँ जो तू लाई मानो
मेरी जिंदगी बनके तू आई.

वो मम्मी से डरके पापा पापा कहते भागना,
और मुझमें चुपके से समाजाना,
सुकून मुझे मिला या तुझे, पता नही,
पर मेरे दुखोका अब कोई अता पता नही,

समय बिता तू बड़ी हो गई,
मानो हर सवाल का जवाब जो हो गई,
अब तू अपने घर जो जाएगी,
पता नही फिर कब आएगी,

अगले जन्म तू फिर बिटिया बनके तू आना,
ढेरो खूंशिया फिर संग लाना

राजीव कुमार

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