बिन तेरे

बिन तेरे

यादों की माचिस जली

अरमानों की लकड़ी गीली

विरहा की तपन से हुआ

मन का आँगन धुँआ-धुँआ

बिन तेरे

फीके लगते मौसम सुहाने

नींद चुराई रातों ने

सपनों के टूटे सपने

बेगाने हुए सभी अपने

बिन तेरे

उमड़-घुमड़ दुःख के बादल

आसमान में बुँदे घायल

आशाओं के चीथड़े आँचल

सिसकियों की बजती पायल

बिन तेरे

आँखों में झील समाई

इन्तजार की नाव डगमगाई

असमंजस की लहरों में खोई

बनी बाबरी जागी सोई

बिन तेरे

तक़दीर ने ली जम्हाई

खुशियों को हिचकी आई

कैसी यह उदासी छाई

उम्मीदों को नींद आई

रोती फफक-फफक तन्हाई

बिन तेरे !

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

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