बेचारा चुनाव चिह्न (हास्य-व्यंग)

बिगड़े पति की हरकतों से परेशान बीवी बोली
सपने में भी मत सोचना मैं कभी तुमसे डरूंगी
ये वादा है मेरा जानू अगर तुम ठीक से रहोगे
भाजपा के चुनाव चिह्न से आपका स्वागत करुँगी

लेकिन बावला पति रहता सदा अपनी धुन में
किसी कली ने नहीं डाली इस भँवरे को घास
पत्नी ने किया आगाह ज़्यादा चतुराई दिखाई तो
फिर कांग्रेस का चुनाव चिह्न है सदैव मेरे पास

दीवाने आशिक की हरकतें होती गयी हद पार
भवंरा मंडराता कभी इस डाल, कभी उस डाल
हर महफ़िल से बेआबरू हो कर निकला भवंरा
मगर फर्क नहीं पड़ा उसे जैसे हो गैंडे की खाल

मेरे हुजूर मगर ध्यान रखना पत्नी ने किया सचेत
चुड़ैल के गुस्से का स्वाद अभी तक नहीं चखा है
करती हूँ खबरदार अगर अब भी अकड़ोगे तो
‘आप’ का चुनाव चिह्न मेरे पलंग के नीचे रखा है

(किशन नेगी ‘एकान्त’ )

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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