बेटी तुझे क्यों जन्म दूँ

बेटी तुझे क्यों जन्म दूँ
सुरक्षित नहीं अब तू इस धरा पर
पहले से राक्षस घात लगाए बैठे हैं
हूँ अबला इसलिए सक्षम नहीं
कि रक्षा कर सकूँ तेरी
क्योंकिं यहाँ खतरे में मेरी भी आबरू
अगर तू आ भी गयी मेरी दहलीज पर
तो ये नरभक्षी नोच डालेंगे तुझे
तब देख न पाएंगी मेरी सहमी आंखें
चीरहरण तेरा इन दरिंदों के हाथों
अस्मिता तेरी सुरक्षित है तभी तक
जब तक धरे न पाँव तू इस जमीं पर
मेरी अजन्मी बेटी
कहते सब हैं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
पर जब आती है बेटी घर में
खुशियों की सौगात लेकर
न जाने क्यों
अमानुष की नज़रों से देखती दुनिया तुझे
मुझे माफ़ करना नन्ही परी
मुझे क्षमा करना मेरी लाड़ली
जन्मूँगी तुझे मैं उस दिन
जिस दिन होगी हर लाड़ली हमारी बेटी
जिस दिन होगी हमारी बेटी दुनिया की लाड़ली
मुझे क्षमा करना मेरी लाड़ली
क्यों और कैसे जन्मू तुझे
एक असहाय व लाचार अबला हूँ मैं
(किशन नेगी ‘एकान्त’ )

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.