बेवफ़ाई

बेवफ़ाई

कुछ ग़म-ए-अब्र का हिसाब आए
बेवफ़ाई में दर्द गज़ब आए

जलते जख़्म में तड़पन भर आए
तन्हा हुवे जाम- ए-शराब आए

रगो मे तेज़ाब सा दौड़ जाए
नशे में ग़म के माहताब आए

तिरी बेवफ़ाई के अब्र छाए
गोया हर सितम से रिसाव आए

के तभी होश-व-हवास गंवाए
साक़ी ज़ाम में आफ़ताब आए

क़हर-ए-बेवफ़ा से घाव पाये
सामने दस्तुर बेनक़ाब आए

मन में उम्मीदों के अब्र छाए
या अल्लाह हाँ में जवाब आए

मेहेर- ओ- वफ़ा को तरस जाए
तु सजन को याद बेहिसाब आए

सजन

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