भूकंप

प्रकृति का कंपन
कम्पित हो गया जीवन
विनाश का रूदन
त्रस्त है जनगण
अनहोनी के लक्षण
हताश नहीं पर मन
करेगें पूनः गठन
सम्पादित होगें नए सपंदन
अश्रुजल से सीचंन
उभरेगा नया जीवन
क्षति का नहीं आकलन
नव निर्माण से पूरण
चलता रहे यह ही प्रण

सजन

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