मन की नमी

मन की नमी

दूब के कोरों पर,
जमी बूँदें शबनमी।
सुनहरी धूप ने,
चख ली सारी नमी।
कतरा-कतरा
पीकर मद भरी बूँदें,
संग किरणों के,
मचाये पुरवा सनसनी।
सर्द हवाओं की
छुअन से पत्ते मुस्काये,
चिड़ियों की हँसी से,
कलियाँ हैं खिलीं,
गुलों के रुख़सारों पर
इंद्रधनुष उतरा,
महक से बौरायी,
हुईं तितलियाँ मनचली।
अंजुरीभर धूप तोड़कर
बोतलों में बंद कर लूँ,
सुखानी है सीले-सीले,
मन की सारी नमी।

#श्वेता🍁

About Sweta Sinha

“कुछ कही अनकही बातें मन के समन्दर में लहरें बन भावनाओं को उद्वेलित करती रहती है,भावों को मथने से जो मोती निकले उन्हें शब्द देकर रचनाओं के माध्यम से गूँथने का प्रयास किया है मैंने”

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