माँ याद बहुत तू आती है !

२ मिनट वाली मैग्गी, अब रोज़ाना बन जाती है,
पर उसको खाने से पहले माँ, याद बहुत तू आती है।

आज भी सुगंध है आती, तेरे आम के आचार की,
लंच बॉक्स के स्वादिष्ट परांठे और तेरे प्यार की,
अब यहाँ, इस नई दुनिया में, जब भूल चूक हो जाती है,
एक कन्धा भी नही है मिलता, याद बहुत तू आती है,
माँ याद बहुत तू आती है।

याद है मुझको जब तूने, अक्षर का ज्ञान सिखाया था,
आचार व्यवहार का पाठ पढ़ाया, चलना भी सिखाया था,
पर तुझे पता है माँ, यह दुनिया एक जाल बिछाना चाहती है,
मैं इस जाल में फंस चूका, यहाँ याद बहुत तू आती है,
माँ याद बहुत तू आती है।

अब शायद मैं थक गया हूँ, माँ तू मुझको पास बुला ले,
मंज़िल नहीं मिल पा रही है, तू बस एक आवाज़ लगा दे,
बहुत दूर मैं चला गया था, मज़बूरी शायद आन पड़ी थी,
तेज दौड़ के आऊंगा, एक बार ह्रदय विश्वास जगा ले,
बहुत हो गयी दुनियादारी, अब यह सही न जाती है,
आकाश की आँखें बेमौसम नम है, याद बहुत तू आती है,
माँ याद बहुत तू आती है।

About Akash Arora

नमस्कार मित्रों !
स्वयं के बारे में सिर्फ इतना बोलूँगा, “इन्द्रधनुष के रंगों से कुछ ख्वाब सजाना चाहता हूँ; आकाश हूँ, संसार में आकाश बनाना चाहता हूँ”

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