माँ

माँ

माँ शब्द है जिन दिलो में यहाँ,
पार हूॅआ है जग जूलो में यहाँ।

दुःख की परछाईयों में जो घिरा ,
छलकते थे दर्द आंखो में वहाँ।

माफ़ किया है उसी माँ ने सदा ,
हम सभी गुनाहगारो है यहाँ।

बरसती उस ह्रदय से दुआ सभी ,
कामयाबी आज ढेरो है यहाँ।

नींद लेते सुख सपने देखते,
जागती वो रात हजारो है यहाँ।

साथ में वो रोई थी हमारे कभी ,
राह में खाई ठोकरों में यहाँ।

बात से उनकी कहानी निकले,
फिरते थे फूल तारों में यहाँ।

देखती थी मूरते मंदिर में ,
फिरभी माँ को हूँ प्यारो में यहाँ।

देकर लहू जिसने सींचा हमें ,
सामने उसके सब हारो है यहाँ।

याद माँ की है मधुरी दिल में,
ये जगत-सागर खारो है यहाँ।

ना फर्क किया कभी माँ ने यहाँ,
ये बच्चे का सहारो है यहाँ।

-मनिषा जोबन देसाई

About Manisha joban Desai

born -3-11-1961 female architect-interior designer surat -gujarat- india

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