मुक्तक — भारत माँ

मुक्तक — भारत माँ

वह बूढ़ी है मगर परी सुन्दर-सी लगती है

वह गाँव में रहती है पर शहर-सी लगती है।

जिसके पास दौड़ बच्चे सभी चहचहाते हैं

वह चिड़िया के प्यारे सब्ज शजर-सी लगती है।

——  भूपेन्द्र कुमार दवे

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