मुक्तक

1- बेवक्त मेघ बरस गये

असहाय किसान तरस गये

कैसे? भरे पेट अपना, हमारा

किसान ये कर्ज मे डूब गये।

2- किसान तब कितना रोया होगा

लहलाती फसल को पल मे खोया होगा

कर्ज के बोझ तले जाने…

कितनो ने मौत को गले लगाया होगा।

 

संजय नेगी ‘सजल’

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*