मुझ संग अगर तुम गावो तो

मुझ संग अगर तुम गावो तो

यह गीत अकेला मैं गाऊँ तो
यह मात्र प्रार्थना कहलावेगा।
मुझ संग अगर तुम गावो तो
यह गीत अमरत्व पा जावेगा।

मेरी प्रार्थना तू सुने न सुने
यह तेरी इच्छा पर निर्भर है।
पर मेरे गीत का अमरत्व तो
तेरे स्वर-संगम पर निर्भर है।

मुझ संग अगर तुम गावो तो
यह गीत अमरत्व पा जावेगा।

तेरे कारण बादल तब आकर
नभ गीतों से गुंजित कर देंगे।
रह रहकर बिजली के कंपन से
गीतों के स्वर-लय चपल बनेंगे।

मुझ संग अगर तुम गावो तो
यह गीत अमरत्व पा जावेगा।

प्रेरित हो जुगनू की चमचम से
तारों की झिलमिल नृत्य करेगी।
और रात्रि की काली वेणी की
दमक दामिनी श्रंगार करेगी।

मुझ संग अगर तुम गावो तो
यह गीत अमरत्व पा जावेगा।

उधर भ्रमरदल फूलों पर आकर
गुनगुनकर इतराते आवेंगे।
प्रेमगीत तब फूलों के अधरों
खुश्बू बनकर पल पल बिखरेंगे।

मुझ संग अगर तुम गावो तो
यह गीत अमरत्व पा जावेगा।

तेरी वीणा के मुखरित सुर से
पाखी के मन नव गीत सजेंगे।
तेरे मेरे मंगल स्वर मिलकर
तब सबका मन हर्षित कर देंगे।

मुझ संग अगर तुम गावो तो
यह गीत अमरत्व पा जावेगा।
… भूपेन्द्र कुमार दवे

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