मुहब्बत करने वाले

*मुहब्बत करने वाले *

खैर तुझसे मुहब्बत करने वाले तो हरदम निकले ,
पर तुझ पर मर मिटने वाले ही बहुत कम निकले ||

संभाला था सदा तेरे आब-ए-तल्ख़ को जिसने ,
अफ़सोस उसके हिस्से में सिर्फ गम ही गम निकले ||

सौपी थी कोरा कागज जिनको लिखने को तकदीर ,
ऐन वक्त पर वे सब बिन स्याही के कलम निकले ||

तेरे चाहने वालो की लम्बी थी कतार जगत में पर ,
सही मायने में तुझे चाहने वाले तो सिर्फ हम निकले ||

About Abhishek Arya

अभिषेक आर्य का जन्म बिहार प्रान्त के पूर्वी चंपारण जिले एक छोटे से कस्बे में ११ सितंबर २००० को हुआ था |इनकी माँ श्रीमति रीना देवी एक कुशल गृहणी हैं एवं इनके पिता श्री बच्चा लाल प्रसाद यादव पेशे से एक समृद्ध किसान हैं | वे बचपन से ही कविता लिखने में रूचि रखते हैं |अपने देश की सेवा एक कुशल वैज्ञानिक एवं कवी के रूप में करना चाहते हैं |

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