मेरा देश फिर भी चल रहा है

स्वतंत्रता दिवस 

अपनी ही लगायी चिंगारियों में  यह जल रहा है,
1947 में आजाद हुआ यह देश 70 साल में ही फिर से गुलामी की ओर चल रहा है,
क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है ।

पब्लिसिटी  की आड़ में असहनशीलता का ढिंढोरा पिट रहा है,
वीवीआईपी  सुरक्षा वाला आदमी इस देश में रहने से डर रहा है,
फुटपाथ पर सोता हुआ इंसान भी बड़ी बड़ी गाडियो तले कुचल रहा है,
तो कही गोमाँस खाना लोगो को लीगल  लग रहा है,
क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है ।

पैसों के लिए जहा देशप्रेम की जगह देशद्रोह का नारा लग रहा है,
एक बच्चे की मौत पर भी जहा कोई वोट बैंक की राजनीती कर रहा है,
और तो और इस देश का नौजवान भी आतंकवादियो को शहीद के रहा है,
इस सब के बाद भी देश का सैनिक वतन की रक्षा के लिए सरहद पर लड़ रहा है,
क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है ।

डॉलर  का रेट 70 रुपए तक चढ़ रहा है,
देश का बच्चा मातृभाषा छोड़ अंग्रेजी की तरफ बाद रहा है,
सरकारी मास्टर कक्षा में बैठ कर व्हाट्सएप्प  कर रहा है,
और दसवीं कक्षा फ़ैल नागरिक भी जहा मंत्री बन रहा है,
क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है ।

पाक  – चाइना आये दिन सीमा में घुस रहा है,
ओलंपिक्स  में भी अब तक अपना प्रदर्शन फुस्स्स रहा है,
आरक्षण  का जहर इस देश को अंदर ही अंदर चूस रहा है,
इस सब के बाद भी अगर आपका खून नहीं खोल रहा है,
तो कोई बात नहीं, साहब मेरा देश तो फिर भी चल रहा है ।

किर्तिश श्रोत्रिय

2 Replies to “मेरा देश फिर भी चल रहा है”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.