मेरा देश

मेरा देश

लगता हैं मेरा देश अब शांत स्वर में बैठा हैं,
कुछ न कर सकता मुहँ पर उंगली लगाये बैठा हैं,
पिघल रहा हैं कश्मीर आज बारूदों के ताप से,
फिर भी मेरा देश आज शीत माहौल चाहता हैं,
जहाँ हर वक़्त रहती थी केशर की महक ,
वहाँ आज हर पल हैं बारूदों की महक,
अब कश्मीर में जीना दुस्वार हो गया हैं,
ये धड़कन हैं भारत की जिस पर दिल न्यौछावर हो गया
हैं,
जिनके ख़ातिर शहीद हुए इस देश के रक्षक,
वे लोग ही बन बैठे हैं इस चमन के भक्षक,

जिसका नहीं ये चमन वो अपना मान लिए बैठे हैं,
हम हर वक़्त देते जवाब ,अपना सीना तान लिए बैठे हैं,

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