मेरी गुडिया सो रही…

मेरी गुडिया सो रही,

उसे जगाना मत।

अभी- अभी आँख लगी है,

उसे रुलाना मत।।

मेरी गुडिया सो रही,

उसे जगाना मत।

आँगन की चिडिया तुम,

पंख मत फडफडाना।

आकर दाना चुगना तुम,

फिर धीरे से उड जाना।।

मेरी गुडिया सो रही,

उसे जगाना मत।

भोर की पहली किरण तुम,

चुपके- चुपके से आना।

अपने तेज प्रकाश में,

शीतलता तुम लाना।।

मेरी गुडिया सो रही,

उसे जगाना मत।

मलय- पवन के झोंके तुम,

धीरे- धीरे से बहना।

बहकर मेरे आँगन को,

अपनी सुगन्ध से महकाना।।

मेरी गुडिया सो रही,

उसे जगाना मत।

आसमान के बादल तुम,

अभि मत गरजना।

अभी- अभी आई है धूप,

अभी मत बरसना।।

मेरी गुडिया सो रही,

उसे जगाना मत।

अभी- अभी आँख लगी है,

उसे रुलाना मत।।

 

संजय नेगी ‘सजल’

 

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