मेरी जान निकल जाती है

 

नजर न फेर यूं मेरी जान निकल जाती है

रूठकर न जा मुझसे आँख मेरी भर आती है।

 

जाने कहां चली बीच राह में छोडकर मुझे

आ जाओ लौटकर तेरी याद सताती है।

 

बहुत दिन हुए तुम्हें देखे बगेर मेरी जान

दिन में चेन नहीं, रातों की नींद उड जाती है।

 

कब तलक जुदा रहोगी मुझसे तुम

ये दिल का दर्द, बहुत बेचेनी होती है।

 

साथ मेरे न होती जब तुम मगर

किताब में रखी तस्वीर तेरी दिल बहलाती है।

 

संजय नेगी ‘सजल’

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