मोहब्बत उसकी

दिल में आज मोहब्बत कही ठहरती ही रही,
उसके दिल में मेरी चाहत कही मरती ही रही,
मैंने बस उसे तड़पाया ही है अपनी मोहब्बत में,
और वो भी इसे मजबूरी में सहती ही रही.
मैं तो जिन्दा हो रहा था उसमे कही ना कही,
और वो तिल तिल करके मुझमे मरती ही रही.
सुनो अब ना आना किसी और के दिल में ऐसे,
जब भी गया कही उसकी बाते ये कहती ही रही.
मैंने तो हर मोड़ से गुजर के देखा पीछे तो,
तेरी यादें मेरे साथ साथ चलती ही रही

श्रेयस अपूर्व “मगरिब”
भोपाल

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