यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है

यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है

यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है
ईश्वर के सब अवतारों का।
इसने ही दिया है धर्म जगत को
सुसंस्कृति और संस्कारों का ।

इसके ग्रंथों ने सबसे पहले
हर मानव को श्रेष्ठ बताया है
सारे जग को एक सूत्र में बँध
बस सूत्र प्रेम का सिखलाया है।

इसके कारण ही मानवता का
मुकुट सजा है अधिकारों का।
यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है
ईश्वर के सब अवतारों का।

सत्य अहिंसा का पथ इक सुन्दर
इसके मंत्रों में दिख जाता है
और निडर हो पथ पर चलना भी
यह धर्म सभी का बन जाता है।

यह संग्रह है सत्य सभ्य शुभ का
अच्छी बातों व विचारों का
यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है
ईश्वर के सब अवतारों का।

सब कर्म विचारों से बनते हैं
सत्कर्म ही पुण्य से शोभित हैं
रही पाप अभिलाषा गर मन में
सब दुष्कर्म उसी से दूषित हैं।

इस धर्म ने कहा है जन्म मरण
बस इक खेल है इशारों का।
यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है
ईश्वर के सब अवतारों का।

यह देश है शान्ति पुजारकों का
वीरों का भी शूर जवानों का
ये शस्त्र उठाते हैं तब ही जब
दुश्मन बनता है शैतानों सा।

पूजी जाती है यहँ माँ काली
असुर पात्र हैं संहारों का।
यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है
ईश्वर के सब अवतारों का।
….. भूपेन्द्र कुमार दवे
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