यादो की बारिश

यादो की बारिश

मोह के हर बंधन को,
मैं तोड़ देता हूँ,
बस तुम्हारी यादो के बंधन मे,
मैं बंध जाता हूँ |

मन की हर डाली,
पराग बन जाती है,
और मैं उस पराग की
खुश्बू मे खो जाता हूँ |

पुरानी किताब के पन्ने
तुम्हे और भी समीप ले आते हैं,
और मे बस तुम्ही मे खो जाता हूँ |
तुम्हारी हर यादो की बूँद को,
मैं छुता हूँ,
और मैं बस उन यादो मे,
खो जाता हूँ |

हाँ, जब भी मैं,
तुम्हारी यादो की बारिश मे,
भीगता हूँ |

राजीव कुमार

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