या सूना है दिल मेरा

या सूना है दिल मेरा
दिल्ली की गलियाँ सूनी हैं, या सूना है दिल मेरा
जिसको कातिल माना मैंने, वो ही निकला दिल मेरा
जिसकी यादें मेरी रातों की, पूरी महफ़िल लूट गयी
सपनों के झंझावातों में, वो ही था साहिल मेरा
वो कहते हैं, है ये शिकायत, दिल तुम मुझको दे ना सके
मजबूरी सुन, तेरे आँगन ही, खोया मैंने दिल मेरा
लिखने की नेमत छीन भी ले, ‘गर खुदा किसी गलियारे मे
मेरी पहचान रहेगी तुझसे ज़िंदा, कहता है मुझसे दिल मेरा
सच पूछो तो उलझन है, सुलझा दो अंतिम बार जो तुम
दिल्ली की गलियाँ सूनी थीं, या सूना था दिल मेरा

About MURARI SINGH

लिखने की नेमत छीन भी ले, 'गर खुदा किसी गलियारे मे मेरी पहचान रहेगी तुझसे ज़िंदा, कहता है मुझसे दिल मेरा

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