ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

हार गया जो चन्द्रगुप्त मौर्य से,

उसे ना जाने क्यों विश्वविजेता का ख़िताब देते है।

अरे जीत तो चन्द्रगुप्त की हुई थी,

फिर क्यों जो जीता उसे सिकंदर का नाम देते है।।

अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का,

यहाँ अकबर को महान्, और भगत सिंह को गद्दार कहते है।।1।।

अस्सी घाव सह कर भी जो मैदान में डटा रहा उस सांगा को कौन जानता है?

पर बाबर को इतिहास ने पूरा सम्मान दिया।

मदिरा पान कर रखेलो को नाचना शौक होता था राजा का,

कृष्ण भक्ति में मीरा क्या नाची अपनों ने ही उसका तिरस्कार किया।।

अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का,

देवी रूपी दुर्गा तो पूजते है मगर घर की लक्ष्मी कोख में ही मार देते है।।2।।

क्यों कहते है की शिक्षित है हम?

जब आज भी अन्धविश्वास और अज्ञानता की पट्टी बाँधे फिरते है।

बेटो की खातिर अलग न्याय,

और बेटियों को सिर्फ अपमान देते है।

आजादी जागीर नही किसी के पुरखो की,

फिर दलित क्यों आज भी गुलामी की जिंदगी जीते है?

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का,

यहाँ गरीबो के घर चूल्हे भी मुश्किल से जलते है।।2।।

जित कर भी हार गया चंद्रगुप्त,

भगत और चंद्रशेखर की कुर्बानी बेकार गई।

हां जागती है कुछ खास पलों में आजादी दिल में,

वरना भ्रष्टाचार की बेड़ियों में हमारी आजादी बेकार गई।।

ये दुर्भाग्य है इस देश का,

की सत्तर साल बाद भी हम आजादी के मायने ढूंढते है।।4।।

इंसानियत का गला गौंत कर अब मन्दिर में पत्थर पूजते है।

अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का,

यहाँ अकबर को महान्, और भगत सिंह को गद्दार कहते है।।5।।
***नि-3***

About Nitin Kalal

From Dungarpur (raj.) Work at Kherwada... i like to express my fillings by poems... I'm not so good like other writers but always try to learn and trying to being perfectionist. gmail- ni3kalal@gmail.com contact no.-8107440773

3 Replies to “ये दुर्भाग्य है मेरे देश का”

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