रिश्तों के मायने

रिश्तों के मायने

यही है आज के बदलते युग और स्मार्ट फ़ोन की सच्चाई

जिंदगी बदल सी गयी है आज, रिश्तों के मायने भी बदल रहे हैं,

उँगलियों पर रिश्ते यहाँ कुछ इस तरह से निभाए जा रहे हैं,

अपनों से दूर परायों को अपना बनाते जा रहे हैं,

कुछ छिपा कर तो कुछ रिश्ते खुले आम निभाए जा रहे हैं,

कोई दगा अपनों को दे रहा परदे में रह कर,

बेपर्दगी की इन्तहां कुछ इस कदर बढ़ रही है,

छिपाना था जिससे उससे ही बेपर्दा हुए जा रहे हैं,

संग दिल अज़ीज़ के बैठ परायों की बातों पे मुस्कुरा रहे हैं,

यहाँ अपने ही पानों से हर रोज़ दूर होते जा रहे हैं,

जिनसे निभानी थी मोहब्बत, उनसे ही बेवफाई किये जा रहे हैं,

यहाँ हर किसी के रिश्तों के मायने आज बदल रहे हैं ॥

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