लगने लगी हैं

मेरी बाते अब उसे बुरी सी लगने लगी हैं,
किसी और की कमी उसे अधूरी सी लगने लगी हैं,
वैसे भी ना माना था उसने मुझे अपना कभी,
अब तो किसी और की साँसे जरूरी सी लगने लगी हैं.
कहते हैं वो चले जाओ अब इस जीवन से बस,
वो कोई और है जिसके बिना हम अधूरी सी लगने लगी हैं.
ना झांकेंगे अब हम किसी की प्यारी आँखों में,
अब तो हर आँख हमें मगरूरी सी लगने लगी हैं.
अब तो मरना ही बस रह गया है बाकी,जब कहा उसने,
अब तो तेरी मोहब्बत भी मजबूरी सी लगने लगी हैं.

श्रेयस अपूर्व “मगरिब”
भोपाल

2 Replies to “लगने लगी हैं”

  1. काश वो अब भी साथ होती, पास होती ।
    तो….
    उसके साथ ही मेरी ये जिंदगी पुरी लगने लगी है ॥

    मजा आ गया सर जी…

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