वक्त का मिजाज

वक्त का मिजाज

बहुत वक्त गुजारा
जिंदगी का हमसाया बनकर
सागर की लहरों की तरह
पल आते गए, पल गुजरते गए
पर कुछ न बदला
लगता था लगेगा वक्त
जिंदगी को बदलने में
मगर जब देखा
वक्त के बदलते मिज़ाज़ को
तो गले उसे लगा लिया
हाथ थामे इक-दूजे का
चल पड़े बनकर हमसफ़र
पर नहीं पता था कि इक दिन
बदला हुआ वक्त ही
जिंदगी बदल देगा
(किशन नेगी ‘एकांत’ )

About Kishan Negi

मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शौक रहा है, लेकिन ये उस समय पूरा नहीं हो सका. चौदह वर्ष की आयु में प्रेमचंद, शिवानी पंत व शेक्सपिअर को पढ़ने का एक अनोखा अवसर मिला, जिनसे मैं बहुत ही परसाभावित हुआ | मेरा येर शौक अचानक ही नहीं बना, अपितु परमात्मा की असीम कृपा से मन में अनेकोनेक विचार कविता गढ़ने के लिए आते रहते हैं |

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