वर्ण पिरामिड

वर्ण पिरामिड

रे
चन्दा
निर्मोही,
करता क्यों
आंख मिचौली।
छिप जा अब तो,
किन्ही खूब ठिठौली।।1।।

जो
बात
कह न
सकते हैं,
हम तुमसे।
सोच उसे फिर
ये नैना क्यों बरसे।।2।।

गा
मन
मल्हार,
मिलन की
रुत है आई।
मोहे ऋतुराज,
मन्द है पुरवाई।।3।।

रो
मत
नादान,
छोड़ दे तू
सारा अज्ञान।
जगत का रहे,
धरा यहीं सामान।।4।।

तू
कर
स्वीकार,
उसे जो है
जग-आधार।
व्यर्थ और सारे,
तत्व एक वो सार।।5।।

About Basudeo Agarwal

परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

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