वीर जवान

ए वीर पुरुष ए वीर जवान,
होती देश में तेरी जयजयकार,
हृदय तेरा कोमल होता शरीर से तू बलवान,
देश के कोने-कोने में होता तेरा यशोगान,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
इस भारत भूमि का कर्ज चुकाना,
अभी करना है तुझे काम,
देश में घुसे दुशमनो का,
करना है उनका काम तमाम,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
पडती है जब देश पर विपत्ति,
छोड देता तू घर-सम्पत्ति,
लडता है तू वीरता से,
प्राप्त हो जाता वीरगति को,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
मरकर भी अमर हो जाता,
ए देश के वीर जवान,
घायल होकर भी लडता रहता,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
आती टोली दुशमनो की घबराता तू नहीं,
दुशमनो को मार गिराकर,
करता है तू काम सही,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
खून-पसीना बहाकर अपना,
बडाता है तू इस देश की शान,
प्यारा है तू इस देश का इन्सान,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
अँग्रेजों के दाँत खटटे करके,
कर दिया उनका काम तमाम,
गली-गली में गूँजे तेरा यह प्यारा नाम,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
सुभाष,भगत और चन्द्रशेखर,
थे जो इस भारत की शान,
होता है इनका यशोगान,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।
होता तेरा एक भगवान,
वह है तेरा अपना देश,
मर-मिटने को तैयार हो जाता,
लडता है सिपाही के भेष,
ए वीर पुरुष ए वीर जवान ।

संजय नेगी
महिन्द्रा राइज
हरिद्वार

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