वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी

वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी

जालिम ज़माने के डर से खामोश रहा करती थी,
नैनों में मगर अपने अश्क़ छुपाए रखती थी।
खोल कर किसी ने उसके सीने से लगी किताब को नही देखा,
सुना है उस किताब में वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी।।1।।
हम गुजरते थे जब उसके महोल्ले से,
मेरे नाम के खूब किस्से सुनाई पड़ते थे।
हम जब नजर उठाकर देखते उसके झरोखे में,
वो परदे की आड़ से हमे देखा करती थी।।2।।
इत्र गुलाब का छिड़क कर जब वो कॉलेज पहली बारी आई थी,
आज भी वो खुशबू पुरे क्लासरूम में महकती है।
मुस्कुराकर मुझसे कुछ कहा था उसने,
वो आवाज अब तक कानो में गूंजती है।।
खोल कर किसी रोज हमने उसके सीने से लगी किताब को नही देखा,
सुना है उस किताब में वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी।।3।।
***नि-3कलाल***

About Nitin Kalal

From Dungarpur (raj.) Work at Kherwada... i like to express my fillings by poems... I'm not so good like other writers but always try to learn and trying to being perfectionist. gmail- ni3kalal@gmail.com contact no.-8107440773

3 Replies to “वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी”

  1. aapki kavita ne ….. apni khani yaad dila di……

    Very very
    nice poem…

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