शहीद की माँ

शहीद की माँ 

बेटा,

बचपन तेरा भोलेपन में

जाने क्या क्या करता था

पलने पर बस लेटे लेटे

हँसता था, मुस्काता था।

 

घुटने के बल चलते चलते

कुछ रुकता फिर बढ़ता था

माँ का आँचल दिख जाने पर

होकर खुश मुस्काता था।

 

और गोद पे चढ़ जाने का

अभिनय प्यारा करता था

बाहर तारों की माला में

चाँद पिरोया करता था।

 

फूलों के गुच्छों पर हरदम

महक प्यार की भरता था

पास बुलाने तितली को तू

‘ऐं ऐं’ कर कुछ कहता था।

 

माँ की गोदी में सिर रखकर

सोता तू मुस्काता था

क्या सपने थे जिसे देखकर

मन ही मन कुछ कहता था।

 

बचपन का तेरा भोलापन

ठुमक ठुमक कर चलता था

चलते चलते पैर पसारे

नटखट हरकत करता था।

 

बारिश की नन्हीं बूँदों को

मुठ्ठी में भर लाता था

कागज नाव बनाकर छोटी

बहते पानी रखता था।

 

नाव चली तो भागा भागा

माँ को पास बुलाता था

उड़ने की चाहत जब जागी

पापा के सिर चढ़ता था।

 

और हाथ फैलाये ऊपर

आसमान को छूता था

पापा के कंधे पर बैठा

बातें ऊँची करता था।

 

बचपन को ‘टाटा’ कहना भी

पापा से ही सीखा था

बचपन से कुछ हटकर चलना

कितना प्यारा लगता था।

 

बचपन छूटा पर ना रूठा

मुझे हँसाया करता था

हरपल दिखता, हरपल छिपता

मुझे छकाया करता था।

 

अब भी वह मुझसे कहता है

‘बचपन कितना प्यारा था

मत रो माँ, मुझे देख तू

जिसको तूने पाला था।

 

‘वही खिलौना हूँ माँ जो

तुमको बहुत दुलारा था

माटी का था पर मनभावन

तेरी आँखों का तारा।

 

‘मैं ही तो टूटा हूँ माँ अब

इक गुड्डा जो माटी था

शहीद मुझे कहेंगे सब जन

पर मैं तेरा बेटा था।

 

‘माँ से मिलने आतुर हो

माटी में जा लेटा था

मत रो माँ, बस थपकी दे जो

जो बचपन तुझसे पाता था।

 

वह चुम्बन भी मुझको दे जो

मुझको प्यारा लगता था।

लेगी गोदी माँ तू मुझको

यही सोचकर आया था।’

 

बेटा,

‘मत रो माँ,’ तू पहले भी यह

बड़े प्यार से कहता था

नन्हें हाथों गिरते आँसू

तू ही पोंछा करता था।

 

पर अब आँसू ढुलक गया तो

कौन इसे अब पोंछेगा

शिथिल हाथ से क्या तू मेरे

भार अश्क का ले पावेगा।

 

तू भी रोया था अंत समय

मुझे यादकर तड़पा था

तू रोया था सावन भादों

तड़प तड़प जब सोया था।

 

माँ का आँसू कतरा है जो

सिसक नहीं अब है पाता

दग्ध हृदय की ज्वाला में अब

जल जलकर है मिट जाता।

 

‘मत रो माँ,’ यह कह दे फिर से

पहले जैसा कहता था

और लिपट जा मुझसे जैसा

बचपन में तू करता था।

…. भूपेन्द्र कुमार दवे

00000

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.