शहीद

शहीद

अभी-अभी

पत्नी नहायी होगी

माथे पर बिंदियाँ

माँग में सपने सजाई होगी

अभी-अभी

बिटियाँ सहेलियों संग

खिल-खिलाई होगी

अभी-अभी

बेटा, पिता जैसा बनने का

ख्वाब बुना होगा

अभी-अभी

माँ को हिचकी आई होगी

बेटे की याद सताई होगी

अभी-अभी

बीमार पिता को उसका

मनी-आँडर मिला होगा

चिंता की लकीरें मिटी होगी

अभी-अभी

बहन को हल्दी चढ़ी होगी

हाथों में मेहंदी लगी होगी

हसरतें उड़ान भरी होगी

अभी-अभी

पैगाम आया है

तिरंगा में लिपटा

शहीद आया है

अभी-अभी

सबकी आँखों में

समंदर उतर आया है

अभी-अभी

दर्द के सैलाब में

एक परिवार अचानक

बह गया है —-

About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

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