शायरी – मौत का खेल बनी जिन्दगी

मौत का खेल बनी जिन्दगी,
की क्या मिसाल दूं ।

काम कुछ भी करू,
ये अपनाने को तैयार रहती है ॥

‘विराज’

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"Poet"

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