शायरी-६

किताब खुलीं जब बरसों बाद,
सब राज़ सर-ए-आम हो गए,
इक नाम ओर कुछ गुलाब थे,
दिखते ही बदनाम हो गए ॥

‘विराज’

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"Poet"

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