शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

कुछ बातें हैं जो मिलजुलकर हमको पूरी करनी है।

न कहें कि सपना अधूरा था

या वादा झूठा सपना था

कसमों का व्यर्थ झमेला था

रस्मों का ढोंग धतूरा था

जो थी दिल की बातें सुन्दर सबको पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

जब शंकित मन घबराता है

इक दूजे का तड़पाता है

खुद पीड़ित हो पीड़ा देना

अपनेपन को कलपाता है

अंतिम साँसों तक की गिनती हमको पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो तुमको पूरी करना है।

महकाये जो जीवन अपना

बस उन फूलों-सा है खिलना

रंग रूप रहे ना रहे पर

मधुरस सिंचितकर है रखना

इक फुलवारी की सजावट हमको पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

मुस्कानों के झूमर से अब

दो हृदय सजाए रखना है

हरपल बीते पल से अच्छा

सुखद बनाये रखना है

अंतः में उभरी छवि की प्रतिमा को पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

पथ हो एक अकेला अपना

इक ही मंजिल पहुँचाता-सा

वादों का वादे ही करना

मकसद से ना हो भटकाता

हर वादे को कर्तव्य समझ

चलकर यूँ तृप्ति प्रीत की हमको पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

पथ की गति छाले गिनते हैं

हर पग शूलों से सजते हैं

प्रेम प्रकट हो गर पग पग पर

दूब बिछा लगता हर कंकर

जो आस प्रभू को थी हमसे उसको पूरी करना है।

शुरु जो की थी कहानी वो हमको पूरी करना है।

                …. भूपेन्द्र कुमार दवे

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