सत्य का ज्ञान

सत्य का ज्ञान सिर्फ दो ही जग़ह हो पाता है l
जब इंसान अस्पताल या श्मशान जाता है ll
किसी इंसान का दर्द वो तभी समझ पाता है l
जब उसे या उसके अपने को दर्द सताता है ll

अपनी बीमारी देख, हम परेशान से हो जाते है l
अपने आगे दूजे का दुःख, समझ नहीं पाते है ll
किन्तु एक बार जब हम अस्पताल पहुंच जाते है l
सभी को दुखी देख, अपना दुःख ही भूल जाते है ll

श्मशान घाट जाते ही हमारी सोच बदल जाती है l
सुलगती हुए चिता के आगे सच्चाई नज़र आती हैll
सोचते है क्यों हम इतना, पैसो के पीछे भागते है l
कितनी भी करे हाय ,अंत में सब ही यही आते है ll

किन्तु ठीक होते ही, इंसान सब कुछ भूल जाता है l
श्मशान से निकलते ही सोच का रंग बदल जाता है ll
फिर से वही द्वेष ,ईर्ष्या, लालच के बदल छा जाते है l
इंसान के रंग गिरगिट की तरह पल में बदल जाते हैll

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