सवाल

सवाल

सवाल यह नहीं कि

हर सवाल का जबाब

ढूढ़ ही लिया जाय

सवाल यह भी नहीं कि

सवाल किन-किन हालातों से

पैदा हुए हों

सवाल यह है कि

कील की तरह सवाल

आखों में जब

चुभने लगे

सपने लहूलुहान हो जाय

तब कोई तो हो

जो अनगिनत हाथों की

ताकत बन जाय

धक्के मार कर

बंद दरवाजों को तोड़ दे

जबाब बाहर निकालें

सपनों को मरने से बचा ले

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About पूनम सिन्हा

M.Sc. Zoology

One thought on “सवाल

  1. पुनमजी,
    अति सुंदर कबिता है
    माँ सारस्वत की कृपा सदा आप पर बनी रहे। आपका शुभेच्छु: प्रेमचंद मुरारका सवाल जब बन जाता है ववाल
    जब करते रहते उसका ही ख्याल
    अगर करते रहे ख्याल
    तो है किसकी मज़ाल
    बारबार हमसे करते रहे सवाल
    हम कुछ ऐसा करेंगे ढोक ताल
    उसका जी का निकल जाये मलाल।

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