सीलन भरी सुबह

सीलन भरी सुबह

गंदी सी
बिन नहायी, ठंड से ठिठुरती
फटे चिथङों में लिपटी
कोने में दुबकी
बैठी थी वो लड़की……
दो तीन बार कि थी उसने कोशिश
अपनी गोद में छुपाये
कंकालित अर्धनग्न बिमार भाई की खातिर
जाने को
सड़क किनारे
जलते अलाव के पास
लेकिन वहां जाकर भी
बारबार लौट आती थी वो
उसी हिमधुसरित
सीलन भरे ठंडे कौने में
क्योंकि
उसकी बर्दाश्त के बाहर थी
वहां आग तापते
लोगों कि आंखों के गर्म नाखूनों की चुभन….. ।।
गोलू…… मेरा प्यारा गोलू…..
इसी नाम से पुकारती थी वो
अपने भाई को
जो इस वक्त तप रहा था
शीतकालीन ज्वर में
जिसने बना रखा था उसे दहकती भट्टी
और
दो यमदूत
थोड़ी ही दूर बैठे
कर रहे थे उसे ले जाने का इंतजार
लेकिन ये जिद्दी लड़की
मौत के रास्ते में अङी बैठी थी
और
हिम्मत बांधे बैठी थी, सुबह के इंतजार में
अपने पास बैठे
अपने भाई के अलावा आखिरी सहारे
गली के एक कुत्ते के साथ
जो मौजूद था
उसके और
पास ही आग तापते
दो पैरों वाले कुत्तों के बीच…..
पानी….. पानी…..
तभी अचानक
तीन दिन से भूखे, भाई के होंठ हिले
और भाग पङी वो
ढूंढने को पानी
गोलू को
करके कुत्ते के हवाले
और
मिल गया मौका
यमदूतों को
और
अलाव तापते कुत्तों को
उन कंकालों से रुह निचोड़ने का
अगली सुबह
लोगों को
वहां तीन मृत शरीर मिले
ठंड से मरे गोलू का……
गर्मी से मरी बहन का……
और
दोनों को ना बचा पाने की
बेबसी लिये कुत्ते का…….
शायद
सुबह भी रोयी होगी
उस दिन,
देरी से आने पर
क्योंकि,
बहुत सीलन भरी थी उस रोज की ठंडक….. 

About Uttam Dinodia

दोस्तों, जिन्दगी की भागदौड़ ने बंजारा बना दिया है। वक्त किसी के साथ ज्यादा समय रूकने नहीं देता और दिल किसी को छोड़ना नहीं चाहता। बस इन्हीं उलझे हुए लम्हात को कुछ अनकहे शब्दों से सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं और मैं "उत्तम दिनोदिया" आपसे, मेरे इन अनकहे शब्द के सफर में साथ चाहता हूं....

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