सोचो ! अगर ये ना होता…

सोचो अगर ये रात ना होती, तो क्या होता l
इंसा हर पल दो के चार, में ही लगा होता ll
दिल को सुकून, ना दिमाग को आराम होता l
इंसा परेशा है जितना और ज्यादा परेशा होताll

सोचो अगर ये सूरज ना होता, तो क्या होता l
बिन सूरज धरती पर जीवन संभव ना होता ll
बिन सूरज पेड़-पौधे अपना भोजन न कर पातेl
बिन पेड़-पौधों के फिर हम साँस भी न ले पाते ll

सोचो अगर ये पेट ना होता, तो फिर क्या होता l
ना कुछ खाना होता ना फिर कुछ कमाना होता ll
ना इंसान दिन-रात की आप-धापी में यूँ खोता l
फिर जब कुछ न होता, तो ये जीवन भी न होता ll

सोचो अगर इंसानियत, ना होती तो क्या होता l
दया, धर्म, मानवता ,क्या होती है पता ना होता ll
लोग आपस में ही, एक दूजे से लड़कर मर जाते l
फिर न यहाँ हम होते, ना ही यहाँ तुम रह पाते ll

देखा जरुरी है हर चीज़,  जिसे ईश्वर ने बनाया है l
सब उसकी कठपुतली है ,सबको उसी ने नचाया हैll

————-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.